योग पर निबन्ध | Essay On Yoga in Hindi

योग हमारे स्वास्थ्य का रहस्य है एक ऐसा रहस्य जिसे सब जानते है लकिन कुछ ही लोग इसे अपनाते हैं और जो भी अपनाते वो हमेशा स्वस्थ्य रहते हैं। तो आज योग पर निबन्ध लेखन करेगे और योग के महत्व को जानेंगे और हो सके तो इसके प्रति जागरूकता फैलायेंगे । यह योग पर निबन्ध सभी स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए उपयोगी है जो class 1 से 12 तक मे पढ़ते है।

योग पर निबन्ध ( Essay On Yoga In Hindi ) और योग के महत्व

स्वस्थ रहना सबसे बड़ा सुख है और सांसारिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है । मन का स्वास्थ्य भी तन के स्वास्थय से जुड़ा । शरीर स्वस्थ है तो मन भी प्रफुल्लित रहता है ।

बिना स्वस्थ रहे मनुष्य को न तो सफलता मिलती है , न ही वह सांसारिक भौतिक सुखों का आनंद ले सकता है और उसे न ही मानसिक शांति मिलती है ।

अंग्रेजी में भी कहा गया है- ‘ Health is Wealth ‘ अर्थात् स्वास्थ्य ही धन है । स्वास्थ्य और योग का बड़ा अटूट संबंध है । आज विश्वभर के वैज्ञानिक यह मान चुके हैं कि योग व व्यायाम , दवा से अधिक उपयोगी है ।

हमारे भारतीय पूर्वजों को यह रहस्य हजारो वर्ष पहले ही ज्ञात था । तन और मन के तालमेल को ठीक बैठाने के लिए . उन्होंने बहुत पहले ही ‘ योगासन ‘ को विधि अपना ली थी । ‘ योग ‘ का अर्थ है काम करने में कुशलता , जो आसन हमारी कार्य – कुशलता को बढ़ाते हैं , उन्हें योगासन कहा जाता है । योगासन का मूल नियम है – शरीर की विभिन्न नस नाड़ियो , मांसपेशियों और अन्य अवयवा को वैज्ञानिक ढंग से क्रियाशील करना व उन्हें विश्राम देना ।

विभिन्न अंगों को क्रियाशील करते हुए जो मुद्रा बनती है उसे ही आसन कहा गया है । ऋषि – महर्षि प्रकृति के खुले आंगन में इन आसनों का अभ्यास करते थे । इसलिए इन आसनों का नामकरण भी प्रायः प्राकृतिक वनस्पतियों , पशु – पक्षियों पर किया गया ।

जैसे – ताड़ासन , पद्मासन , उष्ट्रासन , मयूरासन , भुजंगासन , मत्स्यासन आदि । इन योगासनों के अभ्यास से मानसिक एवं शारीरिक बल बढ़ता है , एकाग्रता बढ़ती है , स्मरण शक्ति का विकास होता है ।

इसलिए ये विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है । कार्यालयों में काम करने वाले भी इन योगासनों से लाभ उठा रहे है और तो और अंतरिक्ष में भी योगासनों पर प्रयोग किए गए है और पाया गया है कि योगासन से अंतरिक्ष यात्रियों को काफी सुविधा हुई है ।

आज के युग में आमतौर पर तनाव और बेचैनी बढ़ रही है , जिससे कम उम्र में ही अनेक रोग फैल रहे है । ऐसे रोगों लिए योगासन बहुत उपयुक्त है । किंतु ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि योगासन केवल रोगमुक्त करते हैं , बल्कि इनसे व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक शक्ति का विकास भी होता है । ये मन को तनाव मुक्त और प्रसन्न रखते है जिससे जीवन का आनंद उठा सके ।

योगासनों के प्रति कुछ सावधानियाँ भी रखनी चाहिए . जैसे इनके बारे में पढ़कर किसी के निर्देशन के बिना योगासन करना ठीक नहीं । प्रारंभ में किसी प्रशिक्षित व्यक्ति या अध्यापक से योगासन सीखना चाहिए । वे आपकी क्षमता और आवश्यकतानुसार आसन सिखाएंगे । उनका धीरे – धीरे अभ्यास करें । समय भी धीरे – धीरे बढ़ाना चाहिए ।

योगासन किसी खुले स्थान पर शांतिपूर्वक और नियम से 20 से 30 मिनट तक करना चाहिए । अच्छे आचार – विचार मनुष्य को अच्छे कार्यों व कर्तव्यपालन की ओर ले जाते हैं ।

अत : कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य और योगासन एक ही सिक्के के दो पहलू है ।

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