Friday, January 21, 2022
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खेल के महत्व पर निबंध । Essay On Importance of Games in Hindi

खेल यानी कि मन और तन की शांति और साथ ही मज़बूती भी लेकिन दुखद है कि आज के समय ये सब video games और किताबों के भोझ तले कही दब सी गयीं हैं । बच्चा न ठीक से खा पाता है ना ही उसका शरीरिक विकास हो पाता है इन सब के पीछे आज का modern culture है। जिसे बच्चों के parents भी बहुत शान से follow करते हैं । खैर छोड़ो ! तो इस लेख में हम खेल के महत्व पर निबंध लिखने वाले हैं और खेलों के महत्व को भी जानेंगे जो आज कल आपके अभिवावक नही बताते होंगे । यह निबंध जिसमे खेल के महत्व और खेलो के प्रकार, खेलों से होने वाले लाभ आदि को इस निबंध में शामिल किया गया है । यह खेल के महत्व पर निबंध आपकी परीक्षा में भी आ सकता है ।

प्रस्तावना –

आज से दो – तीन दशक पहले एक कहावत प्राय : सुनी जाती थी !

खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराव , पड़ोगे - लिखोगे तो बनोगे नवाब ।

किंतु आज जब हम खेलों का नाम लेते हैं तो हमारे सामने सचिन तेंदुलकर , सानिया मिर्जा , साइना नेहवाल , अभिनव बिंद्रा , सुशील कुमार , मैरी कॉम जैसे चेहरे सामने आ जाते हैं । ये वे खिलाड़ी हैं , जिन्होंने खेलों के माध्यम से न केवल अपने परिवार का अपितु सारे राष्ट्र का नाम ऊंचा किया है । धन और मान – सम्मान की आज इनके पास कोई कमी नहीं है ।

खेल के महत्व-

कहते हैं कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है । आज के समय में जो लोग विद्यार्थियों के खेलने को समय की बरबादी मानते हैं , उन्हें पुनः सोचने की आवश्यकता है । जिस प्रकार पुस्तकें पढ़ने से हमारे ज्ञान का विकास होता है , उसी प्रकार खेलने से हमारे शरीर का विकास होता है । नियमित रूप से खेलना व्यायाम का ही रूप है जिससे शरीर में चुस्ती – फुरती आती है । शरीर बलवान और सुंदर बनता है और बीमारी पास नहीं आती ।

खेलों के प्रकार-

मुख्यतः खेल दो प्रकार के होते हैं । एक वे जो घर में ही बैठकर खेले जाते हैं ; जैसे – लूडो , शतरंज , कैरमबोर्ड , वीडियो गेम आदि । परंतु इन खेलों से शारीरिक व्यायाम नहीं होता । मैदान में खेले जाने वाले खेल ही अधिक लाभदायक हैं । इन खेलों में कबड्डी , कुश्ती , फुटबाल , हॉकी , क्रिकेट , बैडमिंटन आदि आते हैं , जिनसे मनोरंजन के साथ – साथ शारीरिक व्यायाम भी होता है ।

खेलों से लाभ-

खेलों के द्वारा हमारे व्यक्तित्व में अनेक गुणों का समावेश होता है । खेलने से हमारे अंदर धैर्य , आत्मविश्वास , अनुशासन , दृढ़ता , सहयोग और नेतृत्व की भावना का विकास होता है । हमें हार और जीत , दोनों में ही अपने मनोभावों पर नियंत्रण रखना आता है ।

उपसंहार-

आज एक ओर जनसंख्या की अधिकता के कारण खेल के मैदान सीमित होते जा रहे हैं तो दूसरी ओर अनेक प्रकार के आधुनिक उपकरण आ जाने से बच्चों का ध्यान टी – वी ० , कंप्यूटर और वीडियो गेम की ओर अधिक रहने लगा है । खेद की बात है कि दुनिया के कई छोटे – छोटे देश भी ओलंपिक की पदक तालिका में भारत से ऊपर रहते हैं । यह निश्चय ही निराशाजनक है । सरकार को चाहिए कि विद्यालयों में शिक्षा के साथ – साथ खेलों की भी उचित व्यवस्था करे । आज खेलों में धन और सम्मान दोनों ही उपलब्ध हैं । खेलों को आजीविका की तरह लिया जाना चाहिए न कि मात्र एक शौक की तरह ।

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