best Moral stories in Hindi | हिंदी कहानियां 2021

इस लेख में waytosuccess की ओर से best Moral stories in Hindi का लेखन किया गया है , ये हिंदी कहानियाँ बहुत रोचक तो हैं ही साथ ही इनसे आपके बच्चो का मानसिक विकास भी होगा उन्हें इन कहानियों से कुछ जीवन की सीख मिलेगी ।ये कहानियां नैतिक शिक्षा पर आधारित हैं । ज्यादा लम्बी कहानियां नही है इनमे कुछ New moral short stories in Hindi 2021 की दी गयी है। इस लेख द्वारा सबसे अच्छी Moral stories in Hindi for kids दी गयी हैं।

Moral stories in Hindi : अभ्यास का महत्व

अभ्यास का महत्व ईश्वर हम सबको बुद्धि देता है । सभी के अंदर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है । जो उस प्रतिभा को पहचानकर परिश्रम करता है . सफलता उसके कदम चूमती है । इस पाठ में एक ऐसे ही बालक की कहानी बताई गई है , जो प्रारंभिक असफलताओं के बाद अपनी प्रतिभा को निखारता है और एक महान व्यक्ति बनता है ।

बहुत समय पहले की बात है । घने जंगल के बीच एक ऋषि का आश्रम था । उसमें बहुत – से बालक शिक्षा प्राप्त करते थे । उनमें एक बालक बहुत मंदबुद्धि था । उसका नाम वरदराज था । वह जो भी पढ़ता था , उसे याद नहीं रहता था । दूसरे बालक उसकी खिल्ली उड़ाते थे । कोई छात्र कहता- ” वरदराज ! जब भगवान बुद्धि बाँट रहे थे , तब तुम कहाँ थे ? ” तब दूसरा छात्र उत्तर देता- ” यह बेचारा तो उस समय खाना खा रहा था । ” तब तीसरा बोलता- ” नहीं , तब तो यह आराम से घोड़े बेचकर सो रहा था । ” यह कहकर वे जोर से हंस पड़ते ।

आश्रम में कोई उसे बन्दर कहता , तो कोई मूर्खराज। आश्रम में पढ़ानेे पाले शिक्षक भी उसके बारे में ऐसी ही बातें करते थे । एक दिन उससे अप्रसन्न होकर एक शिक्षक ने कहा- ” वरदराज । तुम्हें तो ब्रह्मा भी नहीं पढ़ा सकते । ” ये बातें सुनकर वरदराज मन ही मन बहुत दुखी हो जाता है । वह हर बार प्रयास तो करता था , लेकिन वह हर बार असफल हो जाता । उसके साथ पढ़ने वाले विद्यार्थी आगे की कक्षाओं में निकलते जा रहे थे , लेकिन वह उसी कक्षा में था । एक दिन निराश होकर ऋषि ने उससे कहा- ‘ वरदराज ! पढ़ना – लिखना तुम्हारे वश का काम नहीं है ।

मुझे लगता है , तुम्हारे भाग्य में विद्या नहीं है । इससे तो अच्छा यही है कि तुम अपने घर जाओ और वहाँ के गुरु जी की बात सुनकर वरदराज बहुत दुखी हुआ , लेकिन वह क्या कर सकता था ? गुरु जी के चरण छूकर और अपने साथियों से मिलकर वह आश्रम से चल पड़ा । उसका गाँव दूर था । रास्ते में चलते – चलते दोपहर हो गई । उसे भूख लग आई थी । गुरु जी ने रास्ते में खाने के लिए थोड़ा खाना दिया था । रास्ते में एक जगह कुओं आया । वह खाना खाने और पानी पीने के लिए कुँए पर गया ।

वहाँ उसने देखा कि पानी भरने वाली रस्सी की रगड़ से कुएँ पर रखे पत्थर में गहरे निशान बन गए हैं । यह देखकर वह हैरान रह गया । उसने सोचा – जब प्रतिदिन कोमल रस्सी की रगड़ से कठोर पत्थर पर गहरा निशान बन सकता है , तो क्या लगातार अभ्यास करने से मुझे विद्या नहीं आ सकती ? उसका विचार बदल गया । मन में से निराशा का भाव खत्म कर ।

उसने मन में संकल्प किया- ” मैं अब कड़ा परिश्रम करूंगा । प्रतिदिन खूब अभ्यास करूंगा । फिर देखता हूँ कि मुझे विद्या कैसे नहीं आती । ” वह आश्रम में लौट आया । अब उसे न भूख का ध्यान था , न नींद का । वह विद्या के अभ्यास में जुट गया । कुछ ही दिनों में उसकी गिनती आश्रम के तेज़ विद्यार्थियों में होने लगी । यह देखकर गुरु जी भी बहुत प्रसन्न हुए । यही वरदराज बड़ा होकर संस्कृत का बहुत बड़ा विद्वान बना । उसने संस्कृत व्याकरण की दो प्रसिद्ध पुस्तकें लघु सिद्धांत कौमुदी ‘ और ‘ मुग्धबोध ‘ लिखीं । वरदराज की कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि लगन और अभ्यास के बल पर असंभव लगने वाला कार्य भी संभव हो जाता है

तो आज Moral stories in Hindi के इस लेख में हमने क्या सीखा कमेंट कर के अवस्य बताये ।

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