[PDF] मुहावरे (Muhavare) एवं लोकोक्ति : अर्थ व वाक्य प्रयोग सहित

इस लेख में अनेको muhavare दिए गए हैं जो ऐसे muhavare हैं जो हर Exam में पूछें गए हैं या आने की आशंका है । मुहावरे वो शब्द होते हैं जिनमे एक वाक्य का मतलब कही गयी बात को थोड़ा तीखा और मिर्च मसाला डाल कर एक अलग अंदाज में बोलने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे कही गयी बात मुहावरे के रूप में जब बोली जाती है तब उसका रूप अलग होता है लेकिन बात का मतलब समान होता है । तो ऐसे ही कुछ उपयोगी मुहावरे इस लेख में आपको देखने को मिलेगे ।

मुहावरे (Muhavare)

Muhavare का अर्थ

मुहावरे शब्दों का ऐसा समूह है जो सामान्य अर्थ न देकर विशेष अर्थ देता है । मुहावरों के प्रयोग से भाषा रोचक और प्रभावी बन जाती है ; जैसे- ‘ मुँह में पानी आना ‘ का अर्थ ‘ ललचाना ‘ है ।

लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे मुहावरे का अर्थ

लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे – लोक मानस की चिरसंचित अनुभूतियाँ हैं । उनके प्रयोग से भाषा की सजीवता की वृद्धि होती है । मुहावरे भाषा के प्राण हैं ।

मुहावरा – कोई भी ऐसा वाक्यांश , जिसका शब्दार्थ ग्रहण न करके कोई विलक्षण अर्थ ग्रहण किया जाता हो , वह मुहावरा कहलाता है ।

लोकोक्ति – यह वास्तव में वह तीखी युक्ति है जो श्रोता के हृदय पर सीधा प्रभाव डालती है । इसे कहावत , प्रवाद , वाक्य , जनश्रुति आदि नामों से भी संबोधित किया जाता है ।

मुहावरा और लोकोक्ति में अंतर

मुहावरा वाक्यांश है और इसका स्वतन्त्र रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता । लोकोक्ति सम्पूर्ण वाक्य है और इसका प्रयोग स्वतन्त्र रूप से किया जा सकता है । जैसे – ‘ होश उड़ जाना ‘ मुहावरा है । ‘ बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी ‘ लोकोक्ति है ।

समानता : मुहावरे एवं लोकोक्ति

  1. दोनों ही भाषा शैली को सरस एवं प्रभावशाली बनाते हैं ।
  2. दोनों ही गंभीर और व्यापक अनुभव की उपज है ।
  3. दोनों ही विलक्षण अर्थ प्रकट करते हैं ।
  4. दोनों में प्रयुक्त शब्दों के स्थान पर पर्यायवाची या समानार्थी शब्दों का प्रयोग नहीं होता है ।
  5. दोनों की सार्थकता प्रयोग के बाद सिद्ध होती है ।

कुछ मुहावरे तथा उनके वाक्य प्रयोग इस प्रकार हैं

  • कान लगाना : ध्यान देना कान खड़े करना : चौकन्ना होना
  • आँख लगना : निगाह रखना
  • आँख खुलना : सजग होना
  • गाँठ का पूरा : मालदार
  • चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए : बहुत कंजूसी
  • गुड़ गोबर कर देना : बना बनाया काम बिगाड़ देना
  • हथियार डाल देना : हार मान लेना
  • आग लगने पर कुआँ खोदना : संकट के समय बचाव के लिए सोचना
  • उसने तो मेरी आँखें खोल दी : भ्रम को दूर करना ।
  • बोये पेड़ बबूल का आम कहाँ से होय : जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा
  • लाभ ही लाभ : पाँचों उँगलियाँ घी में
  • स्वावलंबी होना : पैरों पर खड़ा होना
  • आसमान फट जाना : अचानक आफत आ पड़ना
  • फोड़ा और सावन हरे न भादो सूखे – सदा एक समान
  • लश्कर में ऊंट बदनाम – दोष किसी का पर नाम किसी और का
  • ससुर वैद्य : धर्म संकट की स्थिति
  • शोक करना : सिर पीटना
  • विहंगम दृष्टि : सरसरी नजर
  • काटो तो खून नहीं : भय के कारण स्तब्ध हो जाना
  • एक आंख न भाना : बिल्कुल अच्छा न लगना
  • ऊँगली उठाना : दोष की ओर संकेत करना
  • मुँह की खाना : हार जाना
  • डपोरशंख : बे सिर – पैर की बातें करने वाला
  • बैल न कूदे , कूदे तंगी : स्वामी के बल पर सेवक का साहस
  • जबान पर लगाम न होना : अनावश्यक रूप से स्पष्टवादी होना
  • आँख का पानी ढल जाना : निर्लज्ज हो जाना
  • थाली का बैंगन : सिद्धांतहीन व्यक्ति
  • तलवार की धार पर चलना : कठिन कार्य करना
  • चूहे के चाम से नगाड़े नहीं मढ़े जाते : सीमित साधनों से बड़े काम नहीं होते
  • अंधे के हाथ बटेर लगना : अपात्र को बड़ी सफलता मिलना
  • तीन लोक से मथुरा न्यारी : सबसे निराला ।
  • कट जाना : आंखे चुराना
  • आँठ कनौजिया नौ चूल्हे ‘ : अलगाव की स्थिति
  • जूते चाटना : खुशामद करना
  • गंगा नहाना : कार्य पूरा कर निश्चित होना
  • आँख लगना : नींद आना
  • नीम हकीम खतरे जान : अल्प ज्ञान हानिकारक होता है
  • बाँझ क्या जाने प्रसव की पीड़ा : जिस पर बीतती है , वही जानता है
  • कान का कच्चा होना : सुनी – सुनायी बातों पर विश्वास करना
  • छक्का – पंजा करना : ओछी हरकत से कार्य सिद्ध करना
  • अंधे को दीपक दिखाना : ना समझ को उपदेश देना
  • आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास : वांछित कार्य की छोड़कर अन्य कार्य में लग जाना
  • आँखों में गड़ना : वस्तु को पाने की उत्कंठ लालसा रखना ।
  • अंडे सेना : घर में बेकार बैठना
  • जूतम पैजार : लड़ाई – झगड़ा होना
  • अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता : अकेला व्यक्ति शक्तिशाली नहीं
  • अक्ल पर पत्थर पड़ना : बुद्धि भ्रष्ट होना
  • द्रौपदी का चीर : कभी समाप्त न होना
  • कूप मंडूक होना : सीमित ज्ञान या सीमित अनुभव होना
  • अंग – अंग फूले न समाना : बहुत आनंदित होना
  • अंगारों पर पैर रखना : जोखिम मोल लेना
  • होनहार बिरवान के होत चीकने पात : होनहार बालक के गुण बचपन से ही दिखाई देने लगते हैं
  • सेर का सवा सेर : एक से बढ़कर दूसरे
  • धूल झोंकना : धोखा देना
  • कान फूंकना : दीक्षित करना
  • सूरत नजर आना : बहुत दिनों बाद दिखाई पड़ना
  • घाट – घाट का पानी पीना : बहुत अनुभवी होना ,
  • जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि : कवि बहुत कल्पनाशील होते हैं ।
  • पुचकारता कुत्ता सिर चढ़े : ओछे लोग मुँह लगाने पर अनुचित लाभ उठाते हैं
  • आँख का नीर ढल जाना : निर्लज्ज हो जाना
  • तोते की तरह आँखे फेरना : पुराने सम्बन्धों को एकदम भुला देना
  • मखमली जूते मारना : मीठी बातों से लज्जित करना
  • हथेली पर सरसों जमाना : काम इतनी जल्दी नहीं हो जाता
  • दाम लगाना : मूल्य आँकना
  • कच्चे घड़े से पानी भरना : ठीक ढंग से काम न करना
  • चाँदी का ऐनक लगाना : किसी न किसी प्रकार प्रतिष्ठा बनाए रखना
  • दिन को दिन रात को रात न समझना : कोई बड़ा काम करते समय अपने सुख आराम का कुछ भी ध्यान न रखना
  • रीढ़ टूटना : निराश हो जाना
  • शैतान की आँत : बहुत लम्बी वस्तु
  • सुबह शाम करना : टाल मटोल करना
  • हाथ ऊँचा होना : दान आदि के लिए मन में उदारता का भाव होना
  • डंके की चोट पर कहना : सबके सामने घोषित करना
  • तीन तेरह होना : तितर बितर होना
  • एड़ी चोटी का पसीना एक करना : अत्यधिक श्रम करना
  • अंग- अंग ढीला होना : शिथिल होना
  • अंधे के हाथ बटेर लगना : किसी वस्तु का अनायास मिलना
  • आँख का पानी ढल जाना : निर्लज्ज हो जाना
  • कलेजा होना : हिम्मत होना
  • ओखली में सिर दिया तो मूसलों का क्या डर : कठिन काम शुरू करने पर कष्ट तो सहन करने ही पड़ते हैं
  • हाथ उठाकर देना : स्वेच्छा से किसी को कुछ देना
  • पानी न माँगना : तत्काल मर जाना
  • सिर उठाना : विरोध में आना

मुहावरे अर्थ सहित

1 . अगर – मगर करना — टाल – मटोल करना

वाक्य प्रयोग – माँ ने अंशुल से पढ़ने के लिए कहा तो वह अगर – मगर करने लगा ।

2 . आँखों में धूल झोंकना — धोखा देना

वाक्य प्रयोग – चोर यात्री की आँखों में धूल झोंककर उसका सामान लेकर भाग गया ।

3 . अंग – अंग ढीला होना — बहुत थक जाना

वाक्य प्रयोग – आठ घंटे लगातार परिश्रम करने के कारण अजय का अंग – अंग ढीला हो गया ।

4. अंगूठा दिखाना —- इंकार करना

वाक्य प्रयोग – जब मैंने अपने मित्र से सहायता मांगी तो उसने अंगूठा दिखा दिया ।

5. अक्ल का दुश्मन —कम समझ वाला

वाक्य प्रयोग – अनिरुद्ध को समझाने की कोशिश करना व्यर्थ है , वह तो अक्ल का दुश्मन है ।

6. अंधे की लकड़ी — एकमात्र सहारा

वाक्य प्रयोग – सुनील अपने बूढ़े माता – पिता के लिए अंधे की लकड़ी है ।

7. कान भरना — चुगली करना

वाक्य प्रयोग – सलीम ने पिता के आते ही भाई के खिलाफ उनके कान भर दिए ।

8. मुँह में पानी भर आना — ललचाना

वाक्य प्रयोग – ताजी मिठाई को देखकर राधिका के मुँह में पानी आ गया ।

9. हवा से बातें करना — बहुत तेज भागना

वाक्य प्रयोग – शीघ्र ही हमारी कार हवा से बातें करने लगी ।

10. नानी याद आना — कष्ट का अनुभव होना ।

वाक्य प्रयोग – पहाड़ों पर चढ़ते समय सबको नानी याद आ गई ।

11. उन्नीस – बीस का अंतर — बहुत कम अंतर

वाक्य प्रयोग – जुड़वाँ भाइयों में उन्नीस – बीस का अंतर है ।

लोकोक्ति

  • अन्दर छूत नहीं , बाहर दुर् – दुर् — मन में कुछ बाहर कुछ
  • अपना सोना खोटा तो परखैया के का दोष ? — अपने ही लोग बुरे हों तो पराये व्यक्तियों को क्या दोष दिया जाए ?
  • अपनी नाक कटे तो कटे , दूसरे का सगुन तो बिगड़े — दूसरों को हानि पहुँचाने के लिए स्वयं की हानि के लिए भी तैयार रहना
  • अब की अब के साथ , जब की जब के साथ — जो सामने हो , उसी की चिन्ता करनी चाहिए ।
  • अवसर चूके डोमिनी गावे ताल – बेताल — समय चूकने पर किसी बात का प्रभाव नहीं पड़ता ।
  • आँख के आगे नाक सूझे क्या खाक — आँख पर परदा पड़ने पर कुछ नहीं सूझता ।
  • आग खायेगा तो अंगार उगलेगा —- बुरे काम का बुरा नतीजा
  • आगे जाए घुटने टूटे , पीछे देखे आँख फूटे — जिधर जाएँ उधर ही संकट
  • आदमी बसे और सोना कसे — साथ रहने पर मनुष्य की और कसौटी पर सोने की परख होती है ,मनुष्य के चरित्र और सोने के गुण की पहचान तुरन्त नहीं होती ।
  • आदमी को ढाई गज़ कफ़न काफ़ी है — इंसान को सन्तोष करना चाहिए ।
  • आप मियाँजी माँगते द्वार खड़े दरवेश — दीन – हीन व्यक्ति किसी की सहायता नहीं कर सकता ।
  • आपा तजे तो हरि को भजे — स्वार्थ छोड़ने से ही परमार्थ होता है ।
  • आयी तो रोज़ी नहीं तो रोज़ा — कमाया तो खाये , नहीं तो भूखे ।
  • आयी है जान के साथ , जाएगी जनाज़े के साथ — असाध्य रोग
  • आस – पास बरसे दिल्ली पड़ी तरसे — जिसको आवश्यकता हो , उसे न मिले ।
  • इक नागिन अरु पंख लगायी —- एक दोष के साथ दूसरे का जुड़ जाना
  • इतनी सी जान , गज़भर ज़बान —- अवस्था के हिसाब से अधिक बोलना

परीक्षा में पूछे गए महत्वपूर्ण मुहावरे

  • अंधेर नगरी : जहाँ धाँधली का बोलबाला हो ।
  • अमर बेल बनना : संग लगे रहना ।
  • अंगूठे पर मारना ( लेना ) : परवाह न करना ।
  • अंचल पकड़ना ( थामना ) : सहारा देना ।
  • अन्न का कल करना : बनी चीज को बिगाड़ देना ।
  • अरण्य – रोदन : व्यर्थ विलाप ।
  • आग पानी साथ रखना : असम्भव कार्य करना ।
  • इन्द्र की परी : बहुत सुन्दर स्त्री ।
  • उधार खाना और भुस में आग लगाना : कर्ज को बढ़ाकर नाश कारक बनाना ।
  • एक ही थैली के चट्टे – बट्टे : एक मेल के मनुष्य ।
  • एक लकड़ी से हाँकना अथवा एक लाठी से सबको हाँकना : समान व्यवहार करना ।
  • ओखली में सिर देना : कष्ट सहने पर उतारू होना ।
  • किनारा कसी करना : दूर होना , साथ छोड़ना ।
  • कुम्हड़ बतिया होना : अशक्त होना ।
  • कौड़ी को मोल बिकना : बेकदर , होना ।
  • खाला का घर : सहज काम , अपना घर । गिरगिट की तरह रंग बदलना : विचारों में जल्दी – जल्दी परिवर्तन करना । धूप में बाल सफेद होना : अनुभव न होना ।
  • निन्यानबे के फेर में पड़ना : धन संग्रह की चिन्ता में पड़ना ।
  • पानी – पानी होना : अत्यन्त लज्जित होना।
  • बगुला भगत होना : भीतर से कपटी होना ।
  • आप मियाँ जी माँगते द्वार खड़े दरवेश : अति दरिद्र के यहाँ भिक्षा माँगने वालों का आना ।
  • चढ़ जा बच्चा सूली पर भला करेंगे राम : बड़ों का छोटों को किसी काम के लिए उकसाना ।
  • आप मियाँ जी माँगते द्वार खड़े दरवेश : अति दरिद्र के यहाँ भिक्षा माँगने वालों का आना ।
  • चढ़ जा बच्चा सूली पर भला करेंगे राम : बड़ों का छोटों को किसी काम के लिए उकसाना ।
  • चोरी का माल मोरी में : गलत ढंग से अर्जित धन गलत ढंग से ही खर्च होता है ।
  • न अंधे को न्योता देते न दो जने आते : न यह काम करते न बवाल खड़ा होता
  • नई घोसन उपलों का तकिया : नया शौक पूरा करने का कोई अटपटा कार्य करना ।

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