Friday, January 21, 2022
HomeHindi Essayमेरा प्रिय मित्र पर निबन्ध | My Best Friend Essay in Hindi

मेरा प्रिय मित्र पर निबन्ध | My Best Friend Essay in Hindi

मेरा प्रिय मित्र : अनमोल रत्न
हम बचपन से ले कर बुढापे तक किसी न किसी मित्र की सहायता से ही अपने जीवन मे आगे बढ़ते है बचपन मे स्कूल के मित्र कॉलेज में कॉलेज के मित्र और शादी विवाह के बाद पत्नि के रूप में मित्र ।
तो आज हम अपने सच्चे मित्र पर निबन्ध लेखन करने जा रहे हैं यह निबन्ध से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलने वाला है और साथ ही परीक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाला आज का निबन्ध मेरा सच्चा मित्र ।

मेरा प्रिय मित्र पर निबन्ध | My Best Friend Essay in Hindi

सच्चा मित्र अनमोल रत्न के समान है । उसके आगे हीरे – मोती , सोने – चाँदी कुछ भी नहीं है । बाइबिल में कहा गया कि सच्चा मित्र विश्व की सर्वश्रेष्ठ दवा है ।

हमारे इतिहास में सच्चे मित्रों के अनेक प्रसंग है । जैसे- कृष्ण – सुदाम की मित्रता , कृष्ण की अर्जुन से मित्रता और राम की सुग्रीव और विभीषण से मित्रता । ये सब सच्ची मित्रता के अनोखे उदाहरण हैं ।

सच्चा मित्र वह होता है जो सुख और दुख दोनों में हमारा साथ देता है । मित्र बनाते समय हमें मित्र की परख करनी चाहिए । जो मित्र विपत्ति के समय हमारा साथ दे और ज़रूरत पड़ने पर कभी अंगूठा न दिखाए , वही सच्चा मित्र होता है । केवल सुख के दिनों में मौज – मस्ती करके , दुख या विपत्ति पड़ने पर आँखें चुराकर मुँह फेर लेने वाले सच्चे मित्र नहीं होते ।

सच्चा मित्र सदैव कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहता है । सच्चा मित्र हमारी अनुपस्थिति में सबके सामने हमारी प्रशंसा करता है और हमारी उपस्थिति में बुराई करता है । वह हमें हमारी गलतियाँ बताकर हमें सुधारता है । जो हमारे सामने हमारी प्रशंसा करता है और हमेशा हमारी हाँ में हाँ मिलाता है , वह सच्चा मित्र नहीं होता है । ऐसा मित्र विपत्ति आने पर साथ छोड़कर भाग जाता है ।

सच्चे मित्र की परख दुख के समय ही होती है । कहा भी गया है कि विपत्ति कसौटी जे कसे ते हिं साँचे मीत ‘ अर्थात जो मुसीबत में साथ दे वही सच्चा मित्र है । सच्चा मित्र दुर्लभ होता है अत : इसे अमूल्य रत्न की तरह संभाल कर रखना चाहिए ।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments